Thursday, March 7, 2013

Dr.Shalini Agam

नमस्ते भारतवर्ष
ये उम्मीद का सूरज है,
जगती आशाओं का सूरज है,
बहुत सो लिए हम-तुम यारों,
अब जागने का सवेरा है,
अपनी सुरक्षा आप करनी है ,किसी मुह न अब ताकना है ,खुद की हिम्मत आप बनकर डटकर मुकाबला करना है अपने हक की इस लड़ाई में ,खुद ही जीना ,खुद ही मरना है डॉ स्वीट एंजिल

Dr.Shalini Agam



नमस्ते भारतवर्ष
अच्छा ये बात तो पक्की है की हम और आप ये सभी बातें बचपन से पढ़ते और सुनतें आयें हैं .....प़र हमारा अनुभव बताता है कि जब-जब हमने इन सब बातों का अनुसरण किया लाभ भी हमें ही मिला है . हैं ना? फिर भी हम वक़्त आने प़र भूल जातें हैं और परेशानियाँ मोल ले लेतें हैं . इसलिए जब भी हम मन को संयत कर और थोड़ी सी प्रसन्नता के साथ ,स्थिर होकर भविष्य की कल्पना करें फिर उस प़र अमल करना प्रारंभकरें या वर्तमान की पेचीदा स्तिथियों से निबटने की सही योजना कार्यान्वित करें तो परिणाम और भी बेहतर आयेंगे
When you have a happy and positive frame of mind , you set in motion opportunities that wil ebanle you to achieve the things you want most of Always find an abundance of things to love about your life, yourself, and all those all.....................................
सफलता का द्वार खोलने के लिए बस कुछ बातों प़र अमल करना होगा ............हम सभी जानतें हैं मगर भूल जातें हैं
मधुर व्यवहार .............हम सभी का है और उस हर हाल में बरकरार रखना हमारी ज़िम्मेदारी है .
सहानुभूति ........ किसको पसंद नहीं ,इसके द्वारा तो हम दुश्मन को भी अपना बना लेतें हैं .
प्रसन्न -मुखारविंद .......देखो ना मुस्कुराते चेहरे प़र कौन ना फ़िदा होगा .अपनी हर बात मनवाने का एक अचूक नुस्खा है ये.
आलोचना का त्याग...........निंदा करके हम अपना और दूसरे दोनों का मूड खराब करतें हैं .जब किसी से कोई परेशानी हुई तब तो हुई अब बार-बार उस दोहरा कर क्यों अपना कीमती वक़्त बर्बाद करतें हैं ,और क्यों दिल में जलन पैदा करतें हैं ,जो पसंद नहीं ,जिसकी आदतें पसंद नहीं उन्हें अपने जीवन में कम से कम जगह दीजिये ,हर-पल कुढ़े से अच्छा है उस situation में पड़ा ही ना जाये
-व्यक्तित्व को निखारने का प्रयत्न ...........वाह ! अपने को निखरने के लिए इससे बढ़िया कुछ हो नहीं सकता
-दूर-दृष्टि ..........हमारा आज और कल सवारने के लिए दूर-दृष्टि से देखिये ...क्या सही है क्या गलत ........सोच -समझ कर ही किसी बात का निर्णय लीजिये
- धर्म -निरपेक्षता........बहुत शांति पैदा करती है समाज में
-अभिमान का त्याग............किस बात का अभिमान करना है ,.....अगर हमसे तुच्छ है कोई { हमारी नज़र में , वैसे इस जगत में कोई प्राणी तुच्छ नहीं हर एक में कोई ना कोई विशेषता है } तो दृष्टि घुमाइए आपसे श्रेष्ठ भी बहुत हैं ...जो आपको अपने से छोटा मान सकतें हैं .
- सिद्धांतों का पालन मानव का धर्म है .....और सिद्धांतों का पालन ना करने से हम अपना आज और आने वाली पीढ़ी का कल खराब कर सकतें हैं .......
- प्रसिद्द मनोविज्ञानी (अज्ञात) के अनुसार ...............
'जो व्यक्ति दूसरों में दिलचस्पी नहीं रखता उसे अपने जीवन में उदासीनता और कठिनाई का सामना
करना पड़ता है
-झुक कर चलने वाले को रत्न मिलतें हैं ..........रत्न मिलने का मतलब यह नहीं की आप रास्ते प़र सिर झुका कर चल दिए तो आपको diamonds मिल जायेंगे ....झुकना मतलब 'विनम्रता ' ..स्वभाव -गत विनम्रता हर प्रकार से फल दायी है .
-नम्रता से देवता भी तुम्हारे वश में हो जातें हैं .
Dr.Sweet Angel.
When you have a happy and positive frame of mind , you set in motion opportunities that wil ebanle you to achieve the things you want most of Always find an abundance of things to love about your life, yourself, and all those all.....................................सफलता का द्वार खोलने के लिए बस कुछ बातों प़र अमल करना होगा ............हम सभी जानतें हैं मगर भूल जातें हैं मधुर व्यवहार .............हम सभी का है और उस हर हाल में बरकरार रखना हमारी ज़िम्मेदारी है .सहानुभूति ........ किसको पसंद नहीं ,इसके द्वारा तो हम दुश्मन को भी अपना बना लेतें हैं .प्रसन्न -मुखारविंद .......देखो ना मुस्कुराते चेहरे प़र कौन ना फ़िदा होगा .अपनी हर बात मनवाने का एक अचूक नुस्खा है ये.आलोचना का त्याग...........निंदा करके हम अपना और दूसरे दोनों का मूड खराब करतें हैं .जब किसी से कोई परेशानी हुई तब तो हुई अब बार-बार उस दोहरा कर क्यों अपना कीमती वक़्त बर्बाद करतें हैं ,और क्यों दिल में जलन पैदा करतें हैं ,जो पसंद नहीं ,जिसकी आदतें पसंद नहीं उन्हें अपने जीवन में कम से कम जगह दीजिये ,हर-पल कुढ़े से अच्छा है उस situation में पड़ा ही ना जाये -व्यक्तित्व को निखारने का प्रयत्न ...........वाह ! अपने को निखरने के लिए इससे बढ़िया कुछ हो नहीं सकता -दूर-दृष्टि ..........हमारा आज और कल सवारने के लिए दूर-दृष्टि से देखिये ...क्या सही है क्या गलत ........सोच -समझ कर ही किसी बात का निर्णय लीजिये - धर्म -निरपेक्षता........बहुत शांति पैदा करती है समाज में -अभिमान का त्याग............किस बात का अभिमान करना है ,.....अगर हमसे तुच्छ है कोई { हमारी नज़र में , वैसे इस जगत में कोई प्राणी तुच्छ नहीं हर एक में कोई ना कोई विशेषता है } तो दृष्टि घुमाइए आपसे श्रेष्ठ भी बहुत हैं ...जो आपको अपने से छोटा मान सकतें हैं .- सिद्धांतों का पालन मानव का धर्म है .....और सिद्धांतों का पालन ना करने से हम अपना आज और आने वाली पीढ़ी का कल खराब कर सकतें हैं .......- प्रसिद्द मनोविज्ञानी (अज्ञात) के अनुसार ...............'जो व्यक्ति दूसरों में दिलचस्पी नहीं रखता उसे अपने जीवन में उदासीनता और कठिनाई का सामना करना पड़ता है -झुक कर चलने वाले को रत्न मिलतें हैं ..........रत्न मिलने का मतलब यह नहीं की आप रास्ते प़र सिर झुका कर चल दिए तो आपको diamonds मिल जायेंगे ....झुकना मतलब 'विनम्रता ' ..स्वभाव -गत विनम्रता हर प्रकार से फल दायी है .-नम्रता से देवता भी तुम्हारे वश में हो जातें हैं .Dr.Sweet Angel.When you have a happy and positive frame of mind , you set in motion opportunities that wil ebanle you to achieve the things you want most of Always find an abundance of things to love about your life, yourself, and all those all.....................................

सफलता का द्वार खोलने के लिए बस कुछ बातों प़र अमल करना होगा ............हम सभी जानतें हैं मगर भूल जातें हैं मधुर व्यवहार .............हम सभी का है और उस हर हाल में बरकरार रखना हमारी ज़िम्मेदारी है .सहानुभूति ........ किसको पसंद नहीं ,इसके द्वारा तो हम दुश्मन को भी अपना बना लेतें हैं .प्रसन्न -मुखारविंद .......देखो ना मुस्कुराते चेहरे प़र कौन ना फ़िदा होगा .अपनी हर बात मनवाने का एक अचूक नुस्खा है ये.आलोचना का त्याग...........निंदा करके हम अपना और दूसरे दोनों का मूड खराब करतें हैं .जब किसी से कोई परेशानी हुई तब तो हुई अब बार-बार उस दोहरा कर क्यों अपना कीमती वक़्त बर्बाद करतें हैं ,और क्यों दिल में जलन पैदा करतें हैं ,जो पसंद नहीं ,जिसकी आदतें पसंद नहीं उन्हें अपने जीवन में कम से कम जगह दीजिये ,हर-पल कुढ़े से अच्छा है उस situation में पड़ा ही ना जाये -व्यक्तित्व को निखारने का प्रयत्न ...........वाह ! अपने को निखरने के लिए इससे बढ़िया कुछ हो नहीं सकता -दूर-दृष्टि ..........हमारा आज और कल सवारने के लिए दूर-दृष्टि से देखिये ...क्या सही है क्या गलत ........सोच -समझ कर ही किसी बात का निर्णय लीजिये - धर्म -निरपेक्षता........बहुत शांति पैदा करती है समाज में -अभिमान का त्याग............किस बात का अभिमान करना है ,.....अगर हमसे तुच्छ है कोई { हमारी नज़र में , वैसे इस जगत में कोई प्राणी तुच्छ नहीं हर एक में कोई ना कोई विशेषता है } तो दृष्टि घुमाइए आपसे श्रेष्ठ भी बहुत हैं ...जो आपको अपने से छोटा मान सकतें हैं .- सिद्धांतों का पालन मानव का धर्म है .....और सिद्धांतों का पालन ना करने से हम अपना आज और आने वाली पीढ़ी का कल खराब कर सकतें हैं .......- प्रसिद्द मनोविज्ञानी (अज्ञात) के अनुसार ...............'जो व्यक्ति दूसरों में दिलचस्पी नहीं रखता उसे अपने जीवन में उदासीनता और कठिनाई का सामना करना पड़ता है -झुक कर चलने वाले को रत्न मिलतें हैं ..........रत्न मिलने का मतलब यह नहीं की आप रास्ते प़र सिर झुका कर चल दिए तो आपको diamonds मिल जायेंगे ....झुकना मतलब 'विनम्रता ' ..स्वभाव -गत विनम्रता हर प्रकार से फल दायी है .-नम्रता से देवता भी तुम्हारे वश में हो जातें हैं .Dr.Sweet Angel.

Dr.Shalini Agam


आजकल हम सभी पूरी तरह पाश्चात्य संस्कृति के रंग मे रँगे हुए हैं .........और ऊपर से ये इन्टरनेट की लुभावनी दुनिय………। जो हमारे सपनों को नयी उड़न देती है ......जहाँ विवाहित होते हुए भी एक से अधिक विवाह या प्रेमी -साथी होना कोई बड़ी बात नहीं
टकराहट होती है भारतीय संस्कृति की पश्चिम की संस्कृति से ..........जहाँ पर पुरुष दोगली मानसिकता को लेकर जी रहें हैं ...समस्या तब उठ खड़ी होती है जब वो स्वम् तो एक से अधिक अफेयर करना ठीक समझता पर पर पत्नी को केवल सती -सावित्री के रूप में देखना चाहता है ...............और सबसे बड़ी मुश्किल तब पैदा होती है जब पत्नी अपने पति को प्राण-पण से चाहती है ..........और किसी दूसरी के साथ उसे बाँट नहीं पाती .....तिल -तिल कर घुटती है .पति,बच्चे,सास-ससुर ,घर,बाहर ,रिश्तेदार,यहाँ तक कि पति का प्यारा कुत्ता तक संभालती है ........पूरी निष्ठां व् ईमानदारी के साथ सिर्फ दो रोटियों के लिये……….????????
कभी-कभी निराश होकर ..या धोखा खायी किसी क्रोधित काली -समान वो बदले की आग में तो जलती ही है चाहती है कि खुद भी भ्रष्ट हो जाये और पति के बनाये रास्ते पर चल निकले ..............और कभी-कभार एसा हो भी जाता है .शायद एक प्रतिशत स्त्रियाँ टूट भी जाती हैं .............पर उसका क्या जिसे अपने पति के अलावा कोई भाता ही नही है ……………… वो पति को न केवल परमेश्वेर मानती है अपितु उसके बिना जीने की एक पल के लिए भी कल्पना नहीं कर पाती .......पति को देख कर ही जिसकी साँस में साँस आती है .........................ये प्यार भी कितना प्यारा होता है न…...मालूम है की धोखा और अपमान के सिवा अब कुछ नहीं मिलना ......फिर भी ………. हर बस उसकी की चाह ...........उसी का धयान,..कभी गलती से छू भर भी ले तो मन -मयूर नाचने लगता है………. ये जानते हुए भी कि अब तू उनकी ज़िन्दगी में कहीं नहीं ...............कभी भी नहीं ………………
हाथों का स्पर्श हटा लेने से
मन का विश्वास कम नहीं हो जाता
अपनों के दृष्टि घुमा लेने से भी
रिश्तों का भान कम नहीं हो जाता
रवि के बादलों में छिप जाने से
दिन का उजाला मिट नहीं जाता
पूर्णमासी का चाँद निकलने पर भी
रात्रि का अंधकार कम नहीं हो जाता
बांध को बाँधने पर भी
मचलती धरा का वेग कम नहीं हो जाता
पति के लाख तिरस्कार के बाद भी
पत्नी की साधना व् प्यार कम नहीं हो जाता
प्रियतम की घोर घृणा के बाद भी
प्रिया का प्रिय पर भरोसा कम नहीं हो जाता
डॉ स्वीट एंजिल
कभी-कभी निराश होकर ..या धोखा खायी किसी क्रोधित काली -समान वो बदले की आग में तो जलती ही है चाहती है कि खुद भी भ्रष्ट हो जाये और पति के बनाये रास्ते पर चल निकले ..............और कभी-कभार एसा हो भी जाता है .शायद एक प्रतिशत स्त्रियाँ टूट भी जाती हैं .............पर उसका क्या जिसे अपने पति के अलावा कोई भाता ही नही है ……………… वो पति को न केवल परमेश्वेर मानती है अपितु उसके बिना जीने की एक पल के लिए भी कल्पना नहीं कर पाती .......पति को देख कर ही जिसकी साँस में साँस आती है .........................ये प्यार भी कितना प्यारा होता है न…...मालूम है की धोखा और अपमान के सिवा अब कुछ नहीं मिलना ......फिर भी ………. हर बस उसकी की चाह ...........उसी का धयान,..कभी गलती से छू भर भी ले तो मन -मयूर नाचने लगता है………. ये जानते हुए भी कि अब तू उनकी ज़िन्दगी में कहीं नहीं ...............कभी भी नहीं ……………… हाथों का स्पर्श हटा लेने सेमन का विश्वास कम नहीं हो जाताअपनों के दृष्टि घुमा लेने से भीरिश्तों का भान कम नहीं हो जातारवि के बादलों में छिप जाने सेदिन का उजाला मिट नहीं जातापूर्णमासी का चाँद निकलने पर भीरात्रि का अंधकार कम नहीं हो जाता बांध को बाँधने पर भीमचलती धरा का वेग कम नहीं हो जातापति के लाख तिरस्कार के बाद भीपत्नी की साधना व् प्यार कम नहीं हो जाताप्रियतम की घोर घृणा के बाद भीप्रिया का प्रिय पर भरोसा कम नहीं हो जाताडॉ स्वीट एंजिल

Dr.Shalini Agam




नमस्ते भारतवर्ष
अच्छा ये बात तो पक्की है की हम और आप ये सभी बातें बचपन से पढ़ते और सुनतें आयें हैं .....प़र हमारा अनुभव बताता है कि जब-जब हमने इन सब बातों का अनुसरण किया लाभ भी हमें ही मिला है . हैं ना? फिर भी हम वक़्त आने प़र भूल जातें हैं और परेशानियाँ मोल ले लेतें हैं . इसलिए जब भी हम मन को संयत कर और थोड़ी सी प्रसन्नता के साथ ,स्थिर होकर भविष्य की कल्पना करें फिर उस प़र अमल करना प्रारंभकरें या वर्तमान की पेचीदा स्तिथियों से निबटने की सही योजना कार्यान्वित करें तो परिणाम और भी बेहतर आयेंगे
When you have a happy and positive frame of mind , you set in motion opportunities that wil ebanle you to achieve the things you want most of Always find an abundance of things to love about your life, yourself, and all those all.....................................
सफलता का द्वार खोलने के लिए बस कुछ बातों प़र अमल करना होगा ............हम सभी जानतें हैं मगर भूल जातें हैं
मधुर व्यवहार .............हम सभी का है और उस हर हाल में बरकरार रखना हमारी ज़िम्मेदारी है .
सहानुभूति ........ किसको पसंद नहीं ,इसके द्वारा तो हम दुश्मन को भी अपना बना लेतें हैं .
प्रसन्न -मुखारविंद .......देखो ना मुस्कुराते चेहरे प़र कौन ना फ़िदा होगा .अपनी हर बात मनवाने का एक अचूक नुस्खा है ये.
आलोचना का त्याग...........निंदा करके हम अपना और दूसरे दोनों का मूड खराब करतें हैं .जब किसी से कोई परेशानी हुई तब तो हुई अब बार-बार उस दोहरा कर क्यों अपना कीमती वक़्त बर्बाद करतें हैं ,और क्यों दिल में जलन पैदा करतें हैं ,जो पसंद नहीं ,जिसकी आदतें पसंद नहीं उन्हें अपने जीवन में कम से कम जगह दीजिये ,हर-पल कुढ़े से अच्छा है उस situation में पड़ा ही ना जाये
-व्यक्तित्व को निखारने का प्रयत्न ...........वाह ! अपने को निखरने के लिए इससे बढ़िया कुछ हो नहीं सकता
-दूर-दृष्टि ..........हमारा आज और कल सवारने के लिए दूर-दृष्टि से देखिये ...क्या सही है क्या गलत ........सोच -समझ कर ही किसी बात का निर्णय लीजिये
- धर्म -निरपेक्षता........बहुत शांति पैदा करती है समाज में
-अभिमान का त्याग............किस बात का अभिमान करना है ,.....अगर हमसे तुच्छ है कोई { हमारी नज़र में , वैसे इस जगत में कोई प्राणी तुच्छ नहीं हर एक में कोई ना कोई विशेषता है } तो दृष्टि घुमाइए आपसे श्रेष्ठ भी बहुत हैं ...जो आपको अपने से छोटा मान सकतें हैं .
- सिद्धांतों का पालन मानव का धर्म है .....और सिद्धांतों का पालन ना करने से हम अपना आज और आने वाली पीढ़ी का कल खराब कर सकतें हैं .......
- प्रसिद्द मनोविज्ञानी (अज्ञात) के अनुसार ...............
'जो व्यक्ति दूसरों में दिलचस्पी नहीं रखता उसे अपने जीवन में उदासीनता और कठिनाई का सामना
करना पड़ता है
-झुक कर चलने वाले को रत्न मिलतें हैं ..........रत्न मिलने का मतलब यह नहीं की आप रास्ते प़र सिर झुका कर चल दिए तो आपको diamonds मिल जायेंगे ....झुकना मतलब 'विनम्रता ' ..स्वभाव -गत विनम्रता हर प्रकार से फल दायी है .
-नम्रता से देवता भी तुम्हारे वश में हो जातें हैं .
Dr.Sweet Angel.
When you have a happy and positive frame of mind , you set in motion opportunities that wil ebanle you to achieve the things you want most of Always find an abundance of things to love about your life, yourself, and all those all.....................................सफलता का द्वार खोलने के लिए बस कुछ बातों प़र अमल करना होगा ............हम सभी जानतें हैं मगर भूल जातें हैं मधुर व्यवहार .............हम सभी का है और उस हर हाल में बरकरार रखना हमारी ज़िम्मेदारी है .सहानुभूति ........ किसको पसंद नहीं ,इसके द्वारा तो हम दुश्मन को भी अपना बना लेतें हैं .प्रसन्न -मुखारविंद .......देखो ना मुस्कुराते चेहरे प़र कौन ना फ़िदा होगा .अपनी हर बात मनवाने का एक अचूक नुस्खा है ये.आलोचना का त्याग...........निंदा करके हम अपना और दूसरे दोनों का मूड खराब करतें हैं .जब किसी से कोई परेशानी हुई तब तो हुई अब बार-बार उस दोहरा कर क्यों अपना कीमती वक़्त बर्बाद करतें हैं ,और क्यों दिल में जलन पैदा करतें हैं ,जो पसंद नहीं ,जिसकी आदतें पसंद नहीं उन्हें अपने जीवन में कम से कम जगह दीजिये ,हर-पल कुढ़े से अच्छा है उस situation में पड़ा ही ना जाये -व्यक्तित्व को निखारने का प्रयत्न ...........वाह ! अपने को निखरने के लिए इससे बढ़िया कुछ हो नहीं सकता -दूर-दृष्टि ..........हमारा आज और कल सवारने के लिए दूर-दृष्टि से देखिये ...क्या सही है क्या गलत ........सोच -समझ कर ही किसी बात का निर्णय लीजिये - धर्म -निरपेक्षता........बहुत शांति पैदा करती है समाज में -अभिमान का त्याग............किस बात का अभिमान करना है ,.....अगर हमसे तुच्छ है कोई { हमारी नज़र में , वैसे इस जगत में कोई प्राणी तुच्छ नहीं हर एक में कोई ना कोई विशेषता है } तो दृष्टि घुमाइए आपसे श्रेष्ठ भी बहुत हैं ...जो आपको अपने से छोटा मान सकतें हैं .- सिद्धांतों का पालन मानव का धर्म है .....और सिद्धांतों का पालन ना करने से हम अपना आज और आने वाली पीढ़ी का कल खराब कर सकतें हैं .......- प्रसिद्द मनोविज्ञानी (अज्ञात) के अनुसार ...............'जो व्यक्ति दूसरों में दिलचस्पी नहीं रखता उसे अपने जीवन में उदासीनता और कठिनाई का सामना करना पड़ता है -झुक कर चलने वाले को रत्न मिलतें हैं ..........रत्न मिलने का मतलब यह नहीं की आप रास्ते प़र सिर झुका कर चल दिए तो आपको diamonds मिल जायेंगे ....झुकना मतलब 'विनम्रता ' ..स्वभाव -गत विनम्रता हर प्रकार से फल दायी है .-नम्रता से देवता भी तुम्हारे वश में हो जातें हैं .Dr.Sweet Angel.

Dr.Shalini Agam Hindi Poetess

तुमने कहा था
तुमने कहा था कि ........

दीप जले आओगे
चन्दा तले प्रेम-चिहं

 माथे पर लेलोगे
सितारों का नेह जब लेगा

 प्यार की बलाएँ
मेरी गिरी जुल्फों को

 गालों से हटा दोगे
..........................पर हर रात की तरह 

आज भी चौखट पर

 रख आयीं हूँ दिया 

उम्मीद जगी है कि तुम

 अभी आओगे

 टिमटिमाते ,जगमगाते 

रात के साये में हम साया बन 

लिपट-लिपट जाओगे.

उफ़ गयी ये निशा भी

 भोर हो गयी 

दीपक की लौ 

मन के साथ बुझ गयी

 बस इतना तो बता दे 

ओ हरजाई 

भुला दिया प्रिय तुमने मुझको

 या ............................

तुम्हारे वहां 

अब रात ही नहीं होती

Tuesday, March 5, 2013

Dr.Shalini Agam Hindi Poetess


पर हृदय में एकांत कितना
अभी तक जी रही थी
सिर्फ एक एकांत
घर में बहुत भीड़ है
पर मन में है एकांत
इस एकांत को तोड़ने 

अभी तक न कोई आया था

 खलबली तो मचा गए सभी

अपने .........???????

कभी तानो की 

कभी अपमान की 

कभी तिरस्कार की 

कभी प्रताड़ना की 

कभी मेरे कर्तव्यों की

 ये करो, ये न करो 

ऐसे करो ,वैसे करो

 मुह मत खोलो

 किसी से मत बोलो

 अधिकारों की बात ही मत करो 

बस कर्तव्य ही निभाते जाओ 

चारों ओर शोर इतना

 पर हृदय में एकांत कितना 

................................

पर ऐसे में आपका आना

 आप में देखा

 एक सरल भाव

 एक अपनापन 

आपने बताया तो जाना

 हाय ......................

मैं भी एक इन्सान हूँ

 इच्छाएं मेरी भी हैं

 ....हाँ ...........

ये सलोनी खिलखिलाहट 

ये आशा-उमंग

 मेरे मन में भी हैं 

रे पागल मन तू भी गाता है…. 
पैर तेरे भी हैं 

जो थिरकना चाहते हैं 

तन तेरा भी चाहता है झूमना

 शायद किसी के आलिंगन में

 या शायद

 किसी के मद भरे गीतों में

 ....बिखरे हुए मोतियों की

 माला को गूंथने का एक साहस

 एक हौंसला ,

एक सहारा

 एक एहसास ,

एक साथी 

एक सरल व्यक्तित्व 

आश्चर्य-जनक ,

प्रतिभाशाली

 स्वंत्र-विचारों का सहायक

 कोई अपनों से अधिक अपना 

....................पर पराया ...........

Dr.Shalini Agam poetess...

बस कुछ पल मेरे लिए भी
सम्मान का मोह भी है
अपमान का भय भी
प्रसिद्धि की चाह भी है
घर की ज़िम्मेदारी भी
प्रसिद्धि को चाहिए
समय और थोडा पैसा भी

कुछ दोस्त भी 

और कम्पूटर  भी

कुछ समय

जो घर ग्रहस्थी से चुरा लूँ

 या उधर ही मांग लूँ 

उनसे जो मेरे अपने हैं

 आँखों के सपने हैं 

पल दो पल अपने लिए

 जो इस चार-दिवारी के भीतर ही

 मुझे मुझ से मिला दें

मेरे होने का एहसास करा दें