Thursday, March 7, 2013
Dr.Shalini Agam
आजकल हम सभी पूरी तरह पाश्चात्य संस्कृति के रंग मे रँगे हुए हैं .........और ऊपर से ये इन्टरनेट की लुभावनी दुनिय………। जो हमारे सपनों को नयी उड़न देती है ......जहाँ विवाहित होते हुए भी एक से अधिक विवाह या प्रेमी -साथी होना कोई बड़ी बात नहीं
Dr.Shalini Agam
नमस्ते भारतवर्ष
अच्छा ये बात तो पक्की है की हम और आप ये सभी बातें बचपन से पढ़ते और सुनतें आयें हैं .....प़र हमारा अनुभव बताता है कि जब-जब हमने इन सब बातों का अनुसरण किया लाभ भी हमें ही मिला है . हैं ना? फिर भी हम वक़्त आने प़र भूल जातें हैं और परेशानियाँ मोल ले लेतें हैं . इसलिए जब भी हम मन को संयत कर और थोड़ी सी प्रसन्नता के साथ ,स्थिर होकर भविष्य की कल्पना करें फिर उस प़र अमल करना प्रारंभकरें या वर्तमान की पेचीदा स्तिथियों से निबटने की सही योजना कार्यान्वित करें तो परिणाम और भी बेहतर आयेंगे
When you have a happy and positive frame of mind , you set in motion opportunities that wil ebanle you to achieve the things you want most of Always find an abundance of things to love about your life, yourself, and all those all....................... ..............
सफलता का द्वार खोलने के लिए बस कुछ बातों प़र अमल करना होगा ............हम सभी जानतें हैं मगर भूल जातें हैं
मधुर व्यवहार .............हम सभी का है और उस हर हाल में बरकरार रखना हमारी ज़िम्मेदारी है .
सहानुभूति ........ किसको पसंद नहीं ,इसके द्वारा तो हम दुश्मन को भी अपना बना लेतें हैं .
प्रसन्न -मुखारविंद .......देखो ना मुस्कुराते चेहरे प़र कौन ना फ़िदा होगा .अपनी हर बात मनवाने का एक अचूक नुस्खा है ये.
आलोचना का त्याग...........निंदा करके हम अपना और दूसरे दोनों का मूड खराब करतें हैं .जब किसी से कोई परेशानी हुई तब तो हुई अब बार-बार उस दोहरा कर क्यों अपना कीमती वक़्त बर्बाद करतें हैं ,और क्यों दिल में जलन पैदा करतें हैं ,जो पसंद नहीं ,जिसकी आदतें पसंद नहीं उन्हें अपने जीवन में कम से कम जगह दीजिये ,हर-पल कुढ़े से अच्छा है उस situation में पड़ा ही ना जाये
-व्यक्तित्व को निखारने का प्रयत्न ...........वाह ! अपने को निखरने के लिए इससे बढ़िया कुछ हो नहीं सकता
-दूर-दृष्टि ..........हमारा आज और कल सवारने के लिए दूर-दृष्टि से देखिये ...क्या सही है क्या गलत ........सोच -समझ कर ही किसी बात का निर्णय लीजिये
- धर्म -निरपेक्षता........बहुत शांति पैदा करती है समाज में
-अभिमान का त्याग............किस बात का अभिमान करना है ,.....अगर हमसे तुच्छ है कोई { हमारी नज़र में , वैसे इस जगत में कोई प्राणी तुच्छ नहीं हर एक में कोई ना कोई विशेषता है } तो दृष्टि घुमाइए आपसे श्रेष्ठ भी बहुत हैं ...जो आपको अपने से छोटा मान सकतें हैं .
- सिद्धांतों का पालन मानव का धर्म है .....और सिद्धांतों का पालन ना करने से हम अपना आज और आने वाली पीढ़ी का कल खराब कर सकतें हैं .......
- प्रसिद्द मनोविज्ञानी (अज्ञात) के अनुसार ...............
'जो व्यक्ति दूसरों में दिलचस्पी नहीं रखता उसे अपने जीवन में उदासीनता और कठिनाई का सामना
करना पड़ता है
-झुक कर चलने वाले को रत्न मिलतें हैं ..........रत्न मिलने का मतलब यह नहीं की आप रास्ते प़र सिर झुका कर चल दिए तो आपको diamonds मिल जायेंगे ....झुकना मतलब 'विनम्रता ' ..स्वभाव -गत विनम्रता हर प्रकार से फल दायी है .
-नम्रता से देवता भी तुम्हारे वश में हो जातें हैं .
Dr.Sweet Angel.When you have a happy and positive frame of mind , you set in motion opportunities that wil ebanle you to achieve the things you want most of Always find an abundance of things to love about your life, yourself, and all those all....................... ..............सफलता का द्वार खोलने के लिए बस कुछ बातों प़र अमल करना होगा ............हम सभी जानतें हैं मगर भूल जातें हैं मधुर व्यवहार .............हम सभी का है और उस हर हाल में बरकरार रखना हमारी ज़िम्मेदारी है .सहानुभूति ........ किसको पसंद नहीं ,इसके द्वारा तो हम दुश्मन को भी अपना बना लेतें हैं .प्रसन्न -मुखारविंद .......देखो ना मुस्कुराते चेहरे प़र कौन ना फ़िदा होगा .अपनी हर बात मनवाने का एक अचूक नुस्खा है ये.आलोचना का त्याग...........निंदा करके हम अपना और दूसरे दोनों का मूड खराब करतें हैं .जब किसी से कोई परेशानी हुई तब तो हुई अब बार-बार उस दोहरा कर क्यों अपना कीमती वक़्त बर्बाद करतें हैं ,और क्यों दिल में जलन पैदा करतें हैं ,जो पसंद नहीं ,जिसकी आदतें पसंद नहीं उन्हें अपने जीवन में कम से कम जगह दीजिये ,हर-पल कुढ़े से अच्छा है उस situation में पड़ा ही ना जाये -व्यक्तित्व को निखारने का प्रयत्न ...........वाह ! अपने को निखरने के लिए इससे बढ़िया कुछ हो नहीं सकता -दूर-दृष्टि ..........हमारा आज और कल सवारने के लिए दूर-दृष्टि से देखिये ...क्या सही है क्या गलत ........सोच -समझ कर ही किसी बात का निर्णय लीजिये - धर्म -निरपेक्षता........बहुत शांति पैदा करती है समाज में -अभिमान का त्याग............किस बात का अभिमान करना है ,.....अगर हमसे तुच्छ है कोई { हमारी नज़र में , वैसे इस जगत में कोई प्राणी तुच्छ नहीं हर एक में कोई ना कोई विशेषता है } तो दृष्टि घुमाइए आपसे श्रेष्ठ भी बहुत हैं ...जो आपको अपने से छोटा मान सकतें हैं .- सिद्धांतों का पालन मानव का धर्म है .....और सिद्धांतों का पालन ना करने से हम अपना आज और आने वाली पीढ़ी का कल खराब कर सकतें हैं .......- प्रसिद्द मनोविज्ञानी (अज्ञात) के अनुसार ...............'जो व्यक्ति दूसरों में दिलचस्पी नहीं रखता उसे अपने जीवन में उदासीनता और कठिनाई का सामना करना पड़ता है -झुक कर चलने वाले को रत्न मिलतें हैं ..........रत्न मिलने का मतलब यह नहीं की आप रास्ते प़र सिर झुका कर चल दिए तो आपको diamonds मिल जायेंगे ....झुकना मतलब 'विनम्रता ' ..स्वभाव -गत विनम्रता हर प्रकार से फल दायी है .-नम्रता से देवता भी तुम्हारे वश में हो जातें हैं .Dr.Sweet Angel.
Dr.Shalini Agam Hindi Poetess
तुमने कहा था
तुमने कहा था कि ........
दीप जले आओगे
चन्दा तले प्रेम-चिहं
माथे पर लेलोगे
सितारों का नेह जब लेगा
प्यार की बलाएँ
मेरी गिरी जुल्फों को
गालों से हटा दोगे
.......................... पर हर रात की तरह
आज भी चौखट पर
रख आयीं हूँ दिया
उम्मीद जगी है कि तुम
अभी आओगे
टिमटिमाते ,जगमगाते
रात के साये में हम साया बन
लिपट-लिपट जाओगे.
उफ़ गयी ये निशा भी
भोर हो गयी
दीपक की लौ
मन के साथ बुझ गयी
बस इतना तो बता दे
ओ हरजाई
भुला दिया प्रिय तुमने मुझको
या ............................
तुम्हारे वहां
अब रात ही नहीं होती
Tuesday, March 5, 2013
Dr.Shalini Agam Hindi Poetess
पर हृदय में एकांत कितना
अभी तक जी रही थी
सिर्फ एक एकांत
घर में बहुत भीड़ है
पर मन में है एकांत
इस एकांत को तोड़ने
अभी तक न कोई आया था
खलबली तो मचा गए सभी
अपने .........???????
कभी तानो की
कभी अपमान की
कभी तिरस्कार की
कभी प्रताड़ना की
कभी मेरे कर्तव्यों की
ये करो, ये न करो
ऐसे करो ,वैसे करो
मुह मत खोलो
किसी से मत बोलो
अधिकारों की बात ही मत करो
बस कर्तव्य ही निभाते जाओ
चारों ओर शोर इतना
पर हृदय में एकांत कितना
................................
पर ऐसे में आपका आना
आप में देखा
एक सरल भाव
एक अपनापन
आपने बताया तो जाना
हाय ......................
मैं भी एक इन्सान हूँ
इच्छाएं मेरी भी हैं
....हाँ ...........
ये सलोनी खिलखिलाहट
ये आशा-उमंग
मेरे मन में भी हैं
रे पागल मन तू भी गाता है….
पैर तेरे भी हैं
जो थिरकना चाहते हैं
तन तेरा भी चाहता है झूमना
शायद किसी के आलिंगन में
या शायद
किसी के मद भरे गीतों में
....बिखरे हुए मोतियों की
माला को गूंथने का एक साहस
एक हौंसला ,
एक सहारा
एक एहसास ,
एक साथी
एक सरल व्यक्तित्व
आश्चर्य-जनक ,
प्रतिभाशाली
स्वंत्र-विचारों का सहायक
कोई अपनों से अधिक अपना
....................पर पराया ...........
Dr.Shalini Agam poetess...
बस कुछ पल मेरे लिए भी
सम्मान का मोह भी है
अपमान का भय भी
प्रसिद्धि की चाह भी है
घर की ज़िम्मेदारी भी
प्रसिद्धि को चाहिए
समय और थोडा पैसा भी
कुछ दोस्त भी
और कम्पूटर भी
कुछ समय
जो घर ग्रहस्थी से चुरा लूँ
या उधर ही मांग लूँ
उनसे जो मेरे अपने हैं
आँखों के सपने हैं
पल दो पल अपने लिए
जो इस चार-दिवारी के भीतर ही
मुझे मुझ से मिला दें
मेरे होने का एहसास करा दें
Monday, October 8, 2012
Dr.Sweet Angel
| namaste India |
सकारात्मक सोच जीवन की विषमतम
परिस्थितियों से लड़ने की सबसे बड़ी शक्ति है
positive Thinking, does it really help?
This question has been asked by
many and
my answer is always the same,
absolutely "YES!" The benefits of
maintaining a
positive attitude are endless. A
positive thinker is confident, they
have a
positive
self-image, they see the good in life
and that is what they focus on.
I am anxiously awaiting your
response!.....
................ ............
and that is what they focus on.
I am anxiously awaiting your
response!.....
................
सकारात्मक सोच जीवन की विषमतम
परिस्थितियों से लड़ने की सबसे बड़ी शक्ति है ,जो
नकारात्मकता को दूर कर हमें
हर क्षेत्र में सहायता प्रदान करती है .
ये केवल किताबी बात नहीं अपितु रोजमर्रा में
अपने अनुभवों से महसूस की जा सकती है
अपने अनुभवों से महसूस की जा सकती है
...............इसका एक उदाहरण मेरे पास है
........मेरी एक विद्यार्थी जो मेरे पास रेकी
सीखने
इसलिए आई क्योंकि किसी ने उसे बताया कि रेकी
करने से अमुक व्यक्ति की सारी परेशानियाँ
बड़ी तेजी से हल हो रहीं हैं .......क्या रेकी
चमत्कार है ?'उसने पूछा........'मैंने कहा नहीं
!
ये केवल उस परमशक्ति में विश्वास दिलाने का
असरकारी मार्ग है जो हमें विश्वास दिलाता है कि
हम सर्व-शक्तिमान हैं और अपनी positive सोच
से अपना जीवन अपने अनुकूल बना लेते हैं '
मेरी विद्यार्थी कि समझ में पहले-पहल कुछ नहीं
आया .......प़र वह जान गयी थी कि इस शक्ति
आया .......प़र वह जान गयी थी कि इस शक्ति
में कुछ न कुछ रहस्य तो ज़रूर छुपा है
..............उसने मेरे से क्लास लेना
प्रारंभ किया
धीरे -धीरे उसकी सोच बदलने लगी ,फिर व्यवहार
आशावादी सोच रखने से मधुर होने लगा .उसके
आशावादी सोच रखने से मधुर होने लगा .उसके
व्यक्तित्व में परिवर्तन आने शुरू हुए ,सबसे बड़ी
बात उसने खुद प़र विश्वास करना सीखा...
और आज वह स्वं को सुखी और सफल मानती है .
सीधी सी बात है कि जब हम आशावादी सोच रखतें
हैं,हर घटना और हर परिस्थिति को अपने
अनुकूल मानते हुए ये कहतें है कि ....'जो हुआ
अच्छे के लिए हुआ '......और मन में यह विश्वास
पैदा
कर लेते है कि जो भी घटना घटी या घट रही है
उसमे कहीं न कहीं हमारा भला छिपा हुआ है ,या
उसमे कहीं न कहीं हमारा भला छिपा हुआ है ,या
जो होता हैं अच्छे के लिए ही होता है, तब हमारी
खुद के लिए बेहतरीन सोचने की शक्ति काम
खुद के लिए बेहतरीन सोचने की शक्ति काम
करती है ,
औए तब निरंतर केवल अच्छा सोचने से जैसे
प्रकृति भी हमें केवल अच्छा ही अच्छा प्रदान करती
प्रकृति भी हमें केवल अच्छा ही अच्छा प्रदान करती
है .
और जब कुछ हमें ठीक नहीं लगता तब हमारी
सकारत्मक सोच हमें तसल्ली देती है की जो भी हो
सकारत्मक सोच हमें तसल्ली देती है की जो भी हो
रहा है हमारे भले के लिए हो रहा है.
मानव मन में ये विश्वास कैसे जगा होगा ,कहना
कठिन है ,लेकिन इस तरह के विश्वास ने मनुष्य
कठिन है ,लेकिन इस तरह के विश्वास ने मनुष्य
का जीवन थोडा आसान अवश्य कर दिया होगा
.इस कारण हम विपरीत से विपरीत परिस्थितियों
.इस कारण हम विपरीत से विपरीत परिस्थितियों
में भी सकारात्मकता देख ही लेतें हैं .मेरे रेकी
सेण्टर में आये दिन इस प्रकार के परीक्षण भी होतें
है
सेण्टर में आये दिन इस प्रकार के परीक्षण भी होतें
है
और प्रमाण भी दिए जातें हैं ............आप भी
महसूस करतें होंगे कि .हरदिन हमारे साथ कोई ना
महसूस करतें होंगे कि .हरदिन हमारे साथ कोई ना
कोई घटना जब घटती है तो अपना बुरा या अच्छा
प्रभाव अवश्य छोडती है अच्छी घटनाएँ हमारे
प्रभाव अवश्य छोडती है अच्छी घटनाएँ हमारे
इस विश्वास का प्रतीक होतीं है कि हम इसी लायक
है ....we deserve this........प़र प्रतिकूल
है ....we deserve this........प़र प्रतिकूल
चीजें हम ये मान कर अलग कर लेतें है कि इसके
पीछे भी हमारी कोई भलाई है ,इससे हम बुरी से
बुरी चीजों में भी कुछ सकारत्मक देख ही लेतें हैं
,हम कई पुरानी और नई घटनाओं का मिलान
,हम कई पुरानी और नई घटनाओं का मिलान
करतें हैं और एक अप्रिय घटना को किसी सुखद
बात से जोड़ देतें हैं .
बात से जोड़ देतें हैं .
असल में सारा मामला स्वं को सुखी बनाने का है
मनुष्य स्वभावत: आशावादी होता होता है
मनुष्य स्वभावत: आशावादी होता होता है
इसलिए वह जीवन में अपने अनुकूल चीजें ढूंढ ही
लेता है .वह किसी नकात्मक चीज के जोड़ के
लेता है .वह किसी नकात्मक चीज के जोड़ के
रूप में कुछ सकारात्मक चीज खोज ही लेता है
—
Dr.Sweet Angel
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